ऐसा भी होता है ........
मंगलवार, 29 जुलाई 2014
गैरों में अपने देखते हैं
अपनों में गैर, गैरों में अपने देखते हैं
अब ये न पूछिए कि हम क्या देखते हैं
वो हर हरकत में ढूंढते हैं फितरत हमारी
सस्ता कितना हो गया, प्यार देखते हैं
(नरेंद्र 'नरेन')
29.8.2014
2 टिप्पणियां:
Unknown
15 अप्रैल 2016 को 6:26 pm बजे
क्या बात आप लेखक भी हैं👌
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Narendra Soni
27 सितंबर 2016 को 1:46 am बजे
ऐसे ही कभी-कभार तुकबंदी :)
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क्या बात आप लेखक भी हैं👌
जवाब देंहटाएंऐसे ही कभी-कभार तुकबंदी :)
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