मंगलवार, 27 सितंबर 2016


जो दिल में है 
वही है जुबान पर

मन यूं हम किसी का 
बहलाया नहीं करते
~नरेन ५.८.२०१६

रूह को सुकून कहाँ बदन से
चुपचाप वह सज़ा सहती है
जो बात जुबां नहीं कह पाती
ख़ामोशियां बयां करती हैं
~नरेन २४.८.२०१६

वो नहीं मिला हमें तो 
किस्मत से क्या गिला
मिल कर भी लोग अक्सर 
मिला कहाँ करते हैं
"नरेन" ६.९.२०१६
सच्चा सौदा करने वालों की

कभी पहचान नहीं मिटती


औरों के लिए जीओ दुनियां में


क्यूंकि मुस्कान नहीं बिकती

~नरेन
२५.९.२०१४

मंगलवार, 29 जुलाई 2014

गैरों में अपने देखते हैं




अपनों में गैर, गैरों में अपने देखते हैं 

अब ये न पूछिए कि हम क्या देखते हैं

 
वो हर हरकत में ढूंढते हैं फितरत हमारी

 
सस्ता कितना हो गया, प्यार देखते हैं


(नरेंद्र 'नरेन')
29.8.2014

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

कंक्रीट का जंगल

शहर देखो तो हमारे
कंक्रीट का जंगल हो गए
घर भी हमारे आज कल
कुश्ती का दंगल हो गए

जिंदगी हमारी कुछ और नहीं
दांव-पेंच तक सिमट कर रह गयी
बात-चीत भी अब तो आपस की
एस एम एस तक निपट कर रह गयी

देखें क्या क्या और कैसे रंग
ये ज़माना हमें आगे दिखायेगा
लेकिन यह शाश्वत सत्य है दोस्तों
आदमी खाली हाथ आया था खाली ही जायेगा

.......© नरेंद्र 'नरेन' १८.४.२०१४

गुरुवार, 25 जुलाई 2013


"बरसात"

बरसात का जादू भी ऐसा, 
कि सर चढ़ कर बोलता है 

बादल भी अब आवारा की तरह, 
इधर उधर डोलता है,

बरस जाता है झम्म से, 
पल भर में कहीं भी कभी भी

वह तो हम से ना कुछ पूछता है, 
ना कुछ बोलता है !!