कंक्रीट का जंगल
शहर देखो तो हमारे
कंक्रीट का जंगल हो गए
घर भी हमारे आज कल
कुश्ती का दंगल हो गए
जिंदगी हमारी कुछ और नहीं
दांव-पेंच तक सिमट कर रह गयी
बात-चीत भी अब तो आपस की
एस एम एस तक निपट कर रह गयी
देखें क्या क्या और कैसे रंग
ये ज़माना हमें आगे दिखायेगा
लेकिन यह शाश्वत सत्य है दोस्तों
आदमी खाली हाथ आया था खाली ही जायेगा
.......© नरेंद्र 'नरेन' १८.४.२०१४