मंगलवार, 27 सितंबर 2016


रूह को सुकून कहाँ बदन से
चुपचाप वह सज़ा सहती है
जो बात जुबां नहीं कह पाती
ख़ामोशियां बयां करती हैं
~नरेन २४.८.२०१६

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