रविवार, 28 अप्रैल 2013



" स्मृतियाँ "


दिल से जुड़ी ये स्मृतियाँ 
कैसे आसानी से भूल जाए कोई,
रोज़ ख्यालों में आ-आ कर 
बे-वक़्त जगाये और रुलाये कोई !

हम नहीं कहते इनसे कभी 
कि चलो हमारे साथ हर कदम, 
फिर ना जाने क्यूँ हर पल हर घड़ी
दृष्टि-पटल पर बरबस छा जाए कोई !

नरेन्द्र "नरेन"
28.4.2013

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

"जिंदगी का सफ़र"

जिंदगी के हर मोड़ पर 
नित नए-नए साथी मिलते, 
जिनसे मिल कर हमारे 
हृदय के पुष्प खिलते !

यह जरुरी नहीं कि वो 
दूर तक चलें हमारे साथ,
बिना कोई दिल में हसरत लिए 
मिलाओ उनसे दोस्ती का हाथ !

ऊपरवाले का हमेशा शुक्रिया करो 
कि सुंदर दोस्ती की दी हमें सौगात,
जिंदगी का सफ़र यूँ ही कट जायेगा 
अच्छे लोगों का गर मिलता रहे साथ !

नरेन्द्र "नरेन"
१७ मार्च, २०१३ 



मंगलवार, 9 अप्रैल 2013


"गुब्बारों सा चंचल बचपन"

गुब्बारों सा चंचल बचपन, आओ खेलें कहती दिल की धड़कन,
जीवन की इस आपा-धापी में, न जाने कहाँ खो गया बचपन !

बारिश की गीली और सौंधी मिट्टी के, वो कच्चे टेढ़े-मेढ़े  घरौंदे, 
लाल-पीले, नीले-काले रिबनों से गुंथे, वो सहेलियों के लम्बे परांदे,
कुछ भी नहीं भूले, हैं याद आज तक, वो खुले खेत वो ढके बरामदे,
जीवन की इस आपा-धापी में, न जाने कहाँ खो गया बचपन !

नन्हे-नन्हे पैरों से चलकर, वो लम्बी पगडंडियाँ नापना,
लुका-छिपी में पकड़े जाने पर, वो हथेलियों से मुहँ को ढांपना,
कंचे, गिट्टे खेलना, लट्टू घुमाना, तितलिओं के पीछे पहरों भागना,
करके याद बचपन के वो दिन, दिल हो जाता है कतरन-कतरन,
जीवन की इस आपा-धापी में, न जाने कहाँ खो गया बचपन !

नरेन 
५.१.२०१२  

सोमवार, 1 अप्रैल 2013

मिलते रहा करो

"मिलते रहा करो"



ये दुश्वारियां कम ना होंगी 

ये मजबूरियां कम ना होंगी, 



मिलने को तरस जाओगे 


अगर ये दूरियां कम ना होंगी !



दिल की आग जलाये रखने के लिए

मिलना-जुलना ज़रूरी है,

दिल से ही दिल को राहत होती है 

एक दूसरे से खुलना जरूरी है !



सच कहता हूँ मेरे दोस्तों

दिल के घावों को सिलते रहा करो,

कितनी भी मजबूरी हो वक़्त की 

एक दूसरे से मिलते रहा करो !


नरेन्द्र 'नरेन्'

०१.४.२०१३