"बरसात"
बरसात का जादू भी ऐसा,
कि सर चढ़ कर बोलता है
कि सर चढ़ कर बोलता है
बादल भी अब आवारा की तरह,
इधर उधर डोलता है,
इधर उधर डोलता है,
बरस जाता है झम्म से,
पल भर में कहीं भी कभी भी
पल भर में कहीं भी कभी भी
वह तो हम से ना कुछ पूछता है,
ना कुछ बोलता है !!
ना कुछ बोलता है !!
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